अध्याय 5 ओवरशैडोव्ड
चमचमाते झूमर के नीचे जूडिथ उस शाम की बेइख्तियार धुरी थी। उसने हल्का बैंगनी, बेहद भड़कीला मरमेड गाउन पहन रखा था, जो उसके दुबले, नाज़ुक बदन से चिपक रहा था; उस पर जड़े सिक्विन मछली के शल्कों की तरह झिलमिला रहे थे।
बॉलरूम की हर निगाह उसी पर टिकी थी। उसके बगल में खड़ा ऑस्टिन भी अपवाद नहीं था। उसकी नज़र, जो आम तौर पर ठंडी और शिकारी-सी रहती थी, आज असीम कोमलता से भरी थी, जब वह उसे अपने बिज़नेस पार्टनर्स से मिलवा रहा था।
छायाओं में खड़ी एला ने अपनी पलकों को नीचे कर लिया, होंठों पर हल्की-सी, बर्फ़ीली मुस्कान खिंच आई।
उसे अफ़वाहें दबाने के लिए यहाँ एला की ज़रूरत नहीं थी। उसे यहाँ एक सहारा, एक सीढ़ी की तरह चाहिए था—ताकि जूडिथ के जन्मदिन पर अपनी “सच्ची मोहब्बत” की हैसियत और ऊँची कर सके।
एला ने अपनी घड़ी देखी। रात 8:15। उसकी फ्लाइट 1:00 बजे थी। उसे बस इतना करना था कि ऑस्टिन देख ले कि उसने उसका हुक्म मान लिया है—और फिर वह ग़ायब हो सकती है।
पर किस्मत, लगता था, आख़िरी बार एक तमाशा चाहती थी।
“एला? क्या बात है! तुम सच में आ गईं?”
एला की रीढ़ तन गई। बुलबुल की तरह मधुर, मुलायम आवाज़ में बनावटी मिठास घुली थी—ऐसी मिठास जो उल्टी करा दे। उसने मुड़कर देखा: जूडिथ उसकी तरफ़ आ रही थी, हाथ में रेड वाइन का गिलास; गालों पर जीत की लालिमा चढ़ी हुई थी।
“ऑस्टिन कुछ इन्वेस्टर्स को ग्रीट करने गए हैं,” जूडिथ ने बेबसी का नाटक करते हुए आह भरी। “तुम्हें पता है, कई लोगों ने अभी मुझे उनकी पत्नी समझ लिया। कितनी अजीब स्थिति थी—समझाना पड़ा।”
जूडिथ ने अपना मुँह ढक लिया, आँखों में साफ़ उकसावा चमक रहा था।
एला पर कोई असर नहीं पड़ा। उसने फिर घड़ी देखी। “ओह। तुम्हारे लिए तो बहुत शर्म की बात होगी।”
एला के शांत जवाब से जूडिथ चौंक गई और मासूमियत का मुखौटा उतर गया। उसकी नज़र ठंडी हो गई, उसमें घमंड की चमक थी। “किस बात का नाटक कर रही हो? मिसेज़ रेमंड का टैग पकड़े रहने से क्या सच में लगता है कि वही पत्नी हो, जो उसे चाहिए? तुम्हें पता है, उसने तुमसे शादी सिर्फ़ अपनी दादी की वजह से की थी। अगर और बेइज़्ज़त नहीं होना चाहतीं, तो बेहतर है तलाक़ के काग़ज़ों पर साइन करो और निकल जाओ।”
“फिक्र मत करो,” एला ने शांत स्वर में कहा, और अपना हाथ अपने सपाट पेट पर हिफ़ाज़त से रख लिया। “मैंने वो टाइटल उसके तकिए पर छोड़ दिया है।”
जूडिथ उन शब्दों का मतलब समझ पाती, उससे पहले ही पीछे से एक जाना-पहचाना, सिहरन पैदा करने वाला एहसास पास आ गया।
“एला।” ऑस्टिन की गहरी आवाज़ ने तनाव को चीर दिया। वह बड़े क़दमों से पास आया, भौंहें नाराज़गी में कसी हुईं, और दोनों औरतों के बीच नज़र दौड़ाई।
ऑस्टिन को देखते ही जूडिथ पल भर में फिर नाज़ुक-सी चिड़िया बन गई। “ऑस्टिन… मैं तो बस एला से कह रही थी कि पहले जो गलतफ़हमी हुई, उस पर वो नाराज़ न हों…”
ऑस्टिन ने झट से एला की कलाई पकड़ ली—पकड़ कसी हुई, चेतावनी-सी। “एला, बेवजह की ज़िद मत करो। मैंने तुम्हें मेरे साथ आने को कहा था, तमाशा खड़ा करने और जूडिथ को उसके जन्मदिन पर परेशान करने को नहीं।”
एला ने उस आदमी को देखा जिसने उसकी बाँह पकड़ रखी थी। अचानक एक बेहद साफ़ याद उसके दिमाग़ में कौंध गई।
सालों पहले, जब ऑस्टिन लकवाग्रस्त था और व्हीलचेयर पर था, एक प्रतिद्वंद्वी एग्ज़ीक्यूटिव ने उसे ताना मारा था—“निकम्मा अपाहिज़” कहकर। आम तौर पर नरमदिल एला इतना भड़क गई थी कि सीधे उस आदमी के ऑफिस में घुस गई, उसे थप्पड़ मारा, और नतीजा पुलिस स्टेशन तक जा पहुँचा। उसने ऑस्टिन रेमंड के लिए दुनिया से लड़ाई लड़ी थी।
तब उसे उससे कितना प्यार था। और अब… सब कितना बेतुका लगता था।
“मेरा हाथ छोड़ो, ऑस्टिन,” एला ने कहा, उसकी आवाज़ में रत्ती भर गर्माहट नहीं थी।
ऑस्टिन की भौंहें और सिकुड़ गईं। उसे आँसू, जलन, या कड़वा झगड़ा उम्मीद था। पर एला की मरी हुई, खाली आँखों ने उसके सीने में एक अनजानी, बेचैन-सी घबराहट भर दी। “एला, मुझे उकसाने से तुम्हारा कोई भला नहीं होगा—”
अचानक एक हाँफती-सी आवाज़ ने उसे बीच में काट दिया।
छपाक।
गहरे लाल रंग की वाइन का गिलास सीधे एला की छाती पर उछाल दिया गया। उसकी सलीकेदार काली ड्रेस पर दाग फैल गया, और शराब उसकी फीकी त्वचा पर बहती चली गई।
“ओह माय गॉड!” जूडिथ चीख पड़ी, चेहरा नकली सदमे और बेबस माफ़ी से लाल। “एला, मुझे बहुत-बहुत सॉरी! मेरा हाथ फिसल गया! मैंने जानबूझकर नहीं किया!”
